Kashi Vishwanath
- aman yadav
- Jan 6, 2023
- 3 min read
Kashi Vishwanath Temple History: हजारों साल पुराना है काशी विश्वनाथ मंदिर, काफी दिलचस्प है विध्वंस और निर्माण की कथा

काशी विश्वनाथ मंदिर का इतिहास युगो-युगांतर से है।
Kashi Vishwanath Temple History: वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद मामला काफी तूल पकड़ चुका है। ज्ञानवापी मस्जिद में हुए सर्वे और वीडियोग्राफी के विवाद ने काफी सालों पुराने विध्वंस गाथाओं को पुनः जन्म दे दिया है। इस मामले के कारण उन सभी अवधारणाओं के आधार पर दावे किए जा रहे हैं कि यहां विश्वनाथ मंदिर तोड़कर ज्ञानवापी मस्जिद का निर्माण हुआ। पौराणिक मान्यताओं की माने तो काशी विश्वनाथ मंदिर का इतिहास युगो-युगांतर से है। विश्वनाथ मंदिर भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। भगवान शिव का यह मंदिर उत्तर प्रदेश के वाराणसी शहर में गंगा नदी के किनारे स्थित है। काशी विश्वनाथ मंदिर को विश्वेश्वर नाम से भी जाना है। विश्वेश्वर शब्द का अर्थ होता है ‘ब्रह्मांड का शासक’। यह मंदिर पिछले कई हजार वर्षों से वाराणसी में स्थित है। मुगल शासकों द्वारा कई बार ध्वस्त किये गए काशी विश्वनाथ मंदिर हिंदू धर्म का प्रतीक और पावन मंदिरो में से एक माना जाता है। आइए जानते हैं विध्वंस और निर्माण से जुड़े काशी विश्वनाथ मंदिर के इतिहास के बारे में।

विश्वनाथ मंदिर का इतिहास हजारों साल पुराना माना जाता है
काशी विश्वनाथ मंदिर का निर्माण
विश्वनाथ मंदिर का इतिहास हजारों साल पुराना माना जाता है। ये मंदिर गंगा नदी के पश्चिमी तट पर है. कहा जाता है कि इस मंदिर का दोबारा निर्माण 11 वीं सदी में राजा हरीशचन्द्र ने करवाया था। 1194 ईसवी में मुहम्मद गौरी ने इसे ध्वस्त कर दिया था। परंतु मंदिर का पुन निर्माण करवाया गया लेकिन 1447 ईसवी में इसे एक बार फिर जौनपुर के सुल्तान महमूद शाह ने तुड़वा दिया। इतिहास के पन्नों में झांकने पर यह ज्ञात होता है कि काशी मंदिर के निर्माण और तोड़ने की घटनाएं 11वीं सदी से लेकर 15वीं सदी तक चलती रही।

औरंगजेब ने 18 अप्रैल 1669 में इस मंदिर को ध्वस्त करा दिया।
औरंगजेब ने कराया मंदिर ध्वस्त
1585 में राजा टोडरमल की मदद से पंडित नारायण भट्ट ने विश्वनाथ मंदिर का एक बार फिर से निर्माण करवाया लेकिन एक बार फिर 1632 में शाहजंहा ने मंदिर का विध्वंस करने के लिए अपनी सेना भेजी लेकिन सेना अपने मकसद में कामयाब नहीं हो पाई। इसके बाद औरंगजेब ने 18 अप्रैल 1669 में इस मंदिर को ध्वस्त करा दिया।

अहिल्याबाई होल्कर ने 1780 में करवाया था मौजूदा मंदिर का पुनः निर्माण। - फोटो : सोशल मीडिया
1780 में करवाया था मौजूदा मंदिर का पुनः निर्माण
इसके बाद करीब 125 साल तक वहां कोई मंदिर नहीं था। वर्तमान में जो बाबा विश्वनाथ मंदिर स्थित है उसका निर्माण महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने 1780 में करवाया था। बाद में महाराजा रणजीत सिंह ने 1853 में 1000 किलोग्राम सोना दान दिया था। इस मंदिर में दर्शन करने के लिए आदि शंकराचार्य, संत एकनाथ, रामकृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानंद, महर्षि दयानंद, गोस्वामी तुलसीदास भी आए थे।

ज्ञानवापी मस्जिद को मुगल शासक औरंगजेब ने मंदिर तोड़कर बनवाया था। - फोटो : अमर उजाला
मंदिर के पास ही विवादित ज्ञानवापी मस्जिद
मंदिर के साथ ही ज्ञानवापी मस्जिद है। कहा जाता है कि मस्जिद मंदिर की ही मूल जगह पर बनाई गई है। ज्ञानवापी मस्जिद को मुगल शासक औरंगजेब ने मंदिर तोड़कर बनवाया था। इसके पीछे भी एक दिलचस्प कथा है जिसका उल्लेख मशहूर इतिहासकार डॉक्टर विश्वंभर नाथ पांडेय की पुस्तक 'भारतीय संस्कृति, मुगल विरासत: औरंगजेब के फ़रमान'' में मिलता है।

मंदिर-मस्जिद के बीच एक कुआं है, जिसे ज्ञानवापी कुआं कहा जाता है। - फोटो : अमर उजाला
विश्वनाथ मंदिर का आकार
विश्वनाथ मंदिर का प्रमुख शिवलिंग 60 सेंटीमीटर लंबा और 90 सेंटीमीटर की परिधि में है। मुख्य मंदिर के आसपास काल-भैरव, कार्तिकेय, विष्णु, गणेश, पार्वती और शनि के छोटे-छोटे मंदिर हैं। मंदिर में 3 सोने के गुंबद हैं, जिन्हें 1839 में पंजाब के महाराजा रणजीत सिंह ने लगवाया था। मंदिर-मस्जिद के बीच एक कुआं है, जिसे ज्ञानवापी कुआं कहा जाता है। ज्ञानवापी कुएं का जिक्र स्कंद पुराण में भी मिलता है। कहा जाता है कि मुगलों के आक्रमण के दौरान शिवलिंग को ज्ञानवापी कुएं में छिपा दिया गया था।




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