कालीघाट काली मंदिर का इतिहास | Kalighat Kali Temple History
- aman yadav
- Jan 8, 2023
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History of Kalighat Kali Temple Kolkata /कालीघाट काली मंदिर, पश्चिम बंगाल के कोलकाता शहर में स्थित एक हिन्दू मंदिर हैं। काली मंदिर देश के 51 शक्तिपीठों में से एक है। हिन्दू धर्म के पौराणिक कथाओं के अनुसार जहां-जहां सती के अंग के टुकड़े, धारण किए वस्त्र या आभूषण गिरे, वहां-वहां शक्तिपीठ अस्तित्व में आए। इसलिए ये अत्यंत पावन तीर्थस्थान कहलाए। इस जगह सती माँ के दांये पाँव के चार अंगुलियां यही गिरी थी।

कालीघाट काली मंदिर की जानकारी – Kalighat Kali Temple
Kalighat Kali Mandir – कालीघाट काली मंदिर पुरे भारत में आस्था का अनुठा केंद्र है। यहा माँ काली की प्रचंद मूरत के दर्शन होते है जो विशालकाय है। काली माँ की लम्बी जीभ जो सोने की बनी हुई है बाहर निकली हुई है और हाथ और दांत भी सोने से ही बने हुए है।
ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव के ताण्डव के समय सती के दाहिने पैर की ऊंगली इसी जगह पर गिरी थी। जहां-जहां सती के अंग के टुकड़े, धारण किए वस्त्र या आभूषण गिरे, वहां-वहां शक्तिपीठ अस्तित्व में आये। ये अत्यंत पावन तीर्थस्थान कहलाये। ये तीर्थ पूरे भारतीय उपमहाद्वीप पर फैले हुए हैं। देवीपुराण में 51 शक्तिपीठों का वर्णन है।
कालीघाट में देवी काली के प्रचंड रुप की प्रतिमा स्थापित है। इस प्रतिमा में देवी काली भगवान शिव के छाती पर पैर रखी हुई हैं। उनके गले में नरमुण्डों की माला है। उनके हाथ में कुल्हाड़ी है। उनके जीभ से रक्त की कुछ बूंदें भी टपक रही हैं। सुंदर मंदिर के अंदर माता काली की लाल-काली रंग की कास्टिक पत्थर की मूर्ति स्थापित है।
माँ की मूरत का चेहरा श्याम रंग में है और आँखे और सिर सिन्दुरिया रंग में है। सिन्दुरिया रंग में ही माँ काली के तिलक लगा हुआ है और हाथ में एक फांसा भी इसी रंग में रंगा हुआ है। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक दस महाविद्याओं में प्रमुख और शक्ति-प्रभाव की अधिष्ठात्री देवी काली का प्रभाव लाखों कोलकाता वासियों के मन पर है।

पौराणिक कथाएं – Kalighat Kali Temple Story
एक अनुश्रुति के अनुसार देवी किसी बात पर गुस्सा हो गई थीं। इसके बाद उन्होंने नरसंहार शुरू कर दिया। उनके मार्ग में जो भी आता वह मारा जाता। उनके क्रोध को शांत करने के लिए भगवान शिव उनके रास्ते में लेट गए। देवी ने गुस्से में उनकी छाती पर भी पांव रख दिया। इसी दौरान उन्होंने शिव को पहचान लिया। इसके बाद ही उनका गुस्सा शांत हुआ और उन्होंने नरसंहार बंद कर दिया।
मंदिर का इतिहास – Kali Mata Mandir Kolkata History
माना जाता है की यह मंदिर 1809 के करीब बनाया गया था। कालीघाट शक्तिपीठ में स्थित प्रतिमा की प्रतिष्ठा कामदेव ब्रह्मचारी (संन्यास पूर्व नाम जिया गंगोपाध्याय) ने की थी। 1836 में धार्मिक आस्था संपन्न जमींदार काशीनाथ राय ने इसका निर्माण कराया था।
कालीघाट का यह मंदिर अघोर साधना और तांत्रिक साधना के लिए भी प्रसिद्ध है। कालीघाट के पास स्थित केवड़तला श्मशान घाट को किसी जमाने में शव साधना का प्रमुख केंद्र माना जाता था।
कालीघाट परिसर में मां शीतला का मंदिर भी है। मां शीतला को भोग में समिष भोज चढ़ाया जाता है। इसके आलावा काली घाट की ही सड़क पर मदर टेरेसा की संस्था मिशनरीज आफ चेरिटी यानी निर्मल हृदय का मुख्यालय भी है।
कैसे जाएँ – Kalighat Kali Temple in Hindi
काली मां का मंदिर सुबह 5 बजे खुल जाता है। दोपहर 12 से 3.30 बजे तक बंद रहता है। शाम को 5 बजे से रात्रि 10 बजे तक फिर मंदिर खुला रहता है। अगर आप कोलकाता में हैं तो यहां के मुख्य स्थल धर्मतल्ला से बस मेट्रो और ट्राम से कालीघाट पहुंचा जा सकता है। तथा कोलकाता भारत के अन्य शहरो से अच्छी तरह जुड़ा हुवा हैं।
मंगलवार और शानिवार के साथ अस्तमी को विशेष पूजा की जाती है और भक्तो की भीड भी बहूत ज्यादा होती है।




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