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बद्रीनाथ का प्राचीन इतिहास और सम्पूर्ण कहानी

  • Writer: aman yadav
    aman yadav
  • Jan 8, 2023
  • 3 min read

भारत के उत्तर में हिमालय की वर्फ से ढकी पर्वत शृंखलाओ की गोद में बसा पवित्र धाम बद्रीनाथ. क्या है बद्रीनाथ का प्राचीन इतिहास और सम्पूर्ण कहानी. हिन्दू जाती के लिए परम पवित्र और पूजनीय तीर्थ स्थल है. हिन्दू शाश्त्र के अनुसार बद्रीनाथ के यात्रा के विना सारे तीर्थ यात्राये अधूरी है. अब से कुछ समय पहले यहाँ की यात्रा बहुत कठिन थी. लेकिन अब सड़क बन जाने के कारण यहाँ तक पहुचने में बहुत सुबिधा हो गयीं है. वाहनों द्वारा बहुत ही सुगमता से यहाँ तक पंहुचा जा सकता है. धार्मिक आस्था और श्रधा के कारण श्रद्धालु यहाँ निरंतर पहुचते रहते है. केवल धार्मिक श्रद्धालु के लिए नहीं बल्कि शैलानी और प्रकृति प्रेमियों के लिए भी. बद्रीनाथ एक मनोरम स्थल है. हिमालय के गढ़वाल क्षेत्र में समुन्द्र तल से लगभग 3122 मीटर की ऊंचाई पर लक्ष्मण गंगा और अलखनंदा के संगम के समीप यह पुन्य भूमि स्थित है. यहाँ गर्म ठन्डे पानी के श्रोत भी है.


बद्रीनाथ का इतिहास क्या है

उतराखंड राज्य मे ही स्थित है बद्रीनाथ धाम इस मंदिर का निर्माण 15 वी शताब्दी का बताया जाता है. यह मंदिर उचे पर्वत पर स्थित है. ऐसी मान्यता है की भगवान बद्रीनाथ के दर्शन कर श्रद्धालु जो उनसे मांगते है वो पूरी हो जाती है. महादेव सबकी मनोकामना पूर्ण करते है ऐसा माना जाता है. की जो पूर्ण जन्म मे कोई पुण्य किए है वही भगवान के दर्शन कर पता है.

मंदिर के चारो तरफ पर्वत पूरी तरह से वर्फ से ढका रहता है जो की मंदिर की शोभा बढ़ाता है. मंदिर तक जाने का मार्ग बहुत ही दुर्गम है फिर भी हजारो की संख्या मे भक्त भगवान बद्रीनाथ के दर्शन के लिए आते है बद्रीनाथ धाम को बद्रीविशाल के नाम से भी जाना जाता है.


बद्रीनाथ धाम के अन्य पवित्र स्थल

  • पंचशीला

  • तप्त कुंड

  • ब्रह्म कुंड

  • कपाट भीम पुल

  • वेद धारा

  • सतोपंत

  • स्वर्गा रोहणी

आदि बद्रीनाथ धाम के प्रमुख पवित्र स्थल है. परंतु बद्री धाम जैसा बैकुंठ धाम इस पृथ्वी पर कोई नहीं है.


दुनिया की प्रथम शिक्षा केंद्र तक्ष शिला

भारत ही नहीं पूरी दुनिया का प्रथम शिक्षा केंद्र तक्ष शिला है .तक्ष शिला मे पूरी दुनिया से छात्र शिक्षा ग्रहण करने के लिए आते थे. यहा से कई बड़े -बड़े विद्वान हुये है. इस विश्वविद्यालय मे हर कोई छात्र आसानी से शिक्षा ग्रहण नहीं कर सकता है. इस विश्वविद्यालय मे प्रवेश लेने के लिए छात्रो को बहुत परिश्रम करने पड़ते थे अर्थात बहुत दिक्कतों का सामना भी करना पड़ता है. हेन सांग , चन्द्रगुप्त , जैसे महान शाशक भी इसी तक्ष शिला से शिक्षा ग्रहण किए थे.

तक्षशिला

तक्षशिला वर्तमान समय मे खण्डहर के रूप मे मिला है. वर्तमान मे पाकिस्तान के पंजाब प्रांत मे है . तक्षशिला विश्वविद्यालय वर्तमान समय मे पाकिस्तान देश मे है. एक खण्डहर के रूप मे काफी समय पहले यह भारत का हिस्सा था परंतु 14 अगस्त 1947 को भारत -पाकिस्तान के बटवारे के बाद तक्षशिला पाकिस्तान के भाग मे चला गया


तक्षशिला के ज्ञानी चौकीदार

ऐसा कहा जाता है. की तक्षशिला विश्वविद्यालय मे (नालंदा ) जिसे चौकीदार के पद पर रखा जाता था. वह बहुत ही ज्ञानी होता था. छात्रो के प्रवेश के दौरान उनका परीक्षा यही चौकीदार ही लेते थे. इसलिए जो सबसे जादा ज्ञाता होता था उसे ही यह काम सौपा जाता था.


आचार्य चाणक्य का तक्षशिला से संबंध

महान अर्थ शास्त्री आचार्य चाणक्य तक्षशिला विश्वविद्यालय से स्नातक किए है. और तक्षशिला विश्वविद्यालय मे अध्यापक भी रहे थे.


तक्षशिला का पाठ्यक्रम

तक्षशिला के पाठ्यक्रम मे आयुर्वेद,धनुर्वेद, व्याकरण, दर्शन शास्त्र, हस्तविद्या, गणित,गणना, ज्योतिष, तपी, वाणिज्य, सर्पविद्या, तंत्र शास्त्र, संगीत, नृत्य और चित्रकला आदि प्रमुख रूप से शामिल था.




 
 
 

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