बद्रीनाथ मंदिर के 10 रहस्य
- aman yadav
- Jan 8, 2023
- 4 min read

हिंदुवो के चार धामों में से एक बद्रीनाथ धाम भगवान विष्णु का निवास स्थल है. यह भारत के उतरांचल राज्य में अलकनंदा नदी के बाये तट पर नारायाण नामक दो पर्वत श्रेणियों के बीच स्थित है. गंगा नदी के मुख्य धारा के किनारे बसा यह तीर्थ स्थल हिमालय में समुन्द्र 3050 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है . आईये जानते है इसके 10 रहस्य.
10 रहस्य बद्रीनाथ मंदिर
हिंदुवो के चार धाम तीर्थ स्थल के नाम है. बद्रीनाथ, द्वारिका, जगननाथ और रामेश्वर ये चार धाम प्रमुख है लेकिन जब व्यक्ति वृन्दावन दर्शन करने जाता है. तो उसे गंगोत्री, यमुनोत्री और केदारनाथ के दर्शन भी करना चाहिए. इन चारो को मिला कर छोटा चार धाम कहा गया है.
केदारनाथ को जहा भगवान शंकर का आराम करने का स्थान माना गया है. वही बद्रीनाथ को श्रृष्टि का आठवा बैकुंठ कहा गया है. जहा भगवान विष्णु 6 माह निंद्रा में रहते है और 6 माह जागते है. यहाँ बद्रीनाथ की मूर्ति शाल ग्राम शिला से बनी हुई है. चतुर्भुज ध्यान मुद्रा में है. यहाँ नर नारायण विघय की पूजा होती है. और अखंड दीप जलता है. जो की अचल ज्ञान ज्योति का प्रतिक है.
बद्रीनाथ का नाम इसलिय बद्रीनाथ है क्योकि यहाँ प्रचुर मात्रा में पाई जाने वाली जंगली बेरी को बद्री कहते है. इसी कारण इस धाम का नाम बद्री पड़ा. यहाँ भगवान विष्णु का विशाल मंदिर है. और यह सम्पूर्ण क्षेत्र प्राकृतिक की गोद में स्थित है.
केदार घाटी में दो पहाड़ है. नर और नारायण पर्वत. विष्णु के 24 अवतारों में से एक नर और नारायण की तपोभूमि हैं. उनके तप से प्रसन्न होकर केदारनाथ में शिव प्रकट हुए. दूसरी ओर बद्रीनाथ धाम है. जहा भगवान विष्णु विश्राम करते है. कहते है की सतयुग में बद्रीनाथ धाम की स्थापना नारायण ने की थी. भगवान केदारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन के बाद बद्री शिव भगवान नर नारायण का दर्शन करने से मनुष्य के सारे पाप नस्ट हो जाते है. और उसे जीवन मुक्ति भी प्राप्त हो जाती है. इसी आशय को शिव पुराण के कोटि को भी व्यक्त किया गया है.
पुराणों के अनुसार भूकंप जल प्रणय और सूखे के बाद गंगा लुप्त हो जाएगी और इसी गंगा के कथा के साथ जुडी है बद्रीनाथ और केदारनाथ की रोचक कहानी. नहीं होंगे बद्रीनाथ के दर्शन क्योकि माना जाता है की जिस दिन नर और नारायण पर्वत आपस में मिल जायेंगे बद्रीनाथ का मार्ग पुरीं तरह बंद हो जायेगा. भक्त बद्रीनाथ के दर्शन नहीं कर पाएंगे. पुराणों के अनुसार आने वाले कुछ वर्षो में वर्तमान बद्रीनाथ धाम और केदारेश्वर धाम लुप्त हो जायेंगे और वर्षो बाद भविष्य वर्दी नामक एक तीर्थ का उदंग होगा. यह भी मान्यता हैं की जोशी मठ में स्थित भी भगवान शिव के मूर्ति का एक हाथ साल दर साल पतला होता जा रहा है . जिस दिन यह हाथ लुप्त हो जायेगा. उस दिन बद्री और केदारनाथ तीर्थ स्थल भी लुप्त होना प्रारंभ हो जायेंगे. badrinath temple history in hindi.
मंदिर में बद्रीनाथ के दाहिने ओर कुबेर की मूर्ति भी है. उनके सामने उध्वजी है तथा उत्सुर मूर्ति है. शीत काल में वर्फ जमने पर जोशी मठ में ले जायी जाती है. उध्व्जी के पाशी चरण पादुका है बायीं ओर नर नारायण की मूर्ति है. इनके समीप ही श्री देवी और भू देवी है.
भगवान विष्णु की प्रतिमा वाला वर्तमान मंदिर तीन हजार हजार एक सौ तेतीस मीटर की ऊंचाई पर स्थित है. और माना जाता है की आदि शंक्र्चर्या आठवी शताब्दी के दर्शनिक शंत ने इनका निर्माण कराया था. इसके पश्चिम में 27 किलोमीटर की दुरी पर स्थित बद्रीनाथ शिखर की ऊंचाई सात हजार एक सौ अड़तीस मीटर है. बद्रीनाथ में एक मंदिर है. जिसमे बद्रीनाथ या विष्णु की वेदी है. यह दो हजार से भी अधिक समय से यह तीर्थ स्थल रहा है. बद्रीनाथ में अन्य और कई प्राचीन स्थल है जैसे अलकनंदा के तट पर स्थित अदभुत गर्म झरना जिसे तप्त कुंड कहां जाता है. यह समतल चबूतरा जिसे भ्रम कपाल कहा जाता है. पौराणिक कथावो में उल्लेखित शाप शिला है. शेष नाग की कथित छाव वाला एक शिला खंड है.
पौराणिक कथाओ और यहाँ की लोक कथाओ के अनुसार यहाँ नीलकंठ पर्वत के समीप भगवान विष्णु ने बाल रूप में अवतरण किया था. कहते है की भगवान विष्णु अपने ध्यान योग और विश्राम हेतु एक उपयुक्त स्थान खोज रहे थे. और उन्हें अलकनंदा नदी के समीप यह स्थान बहुत भा गया उस वक्त यह स्थान भगवान शंकर और पार्वती का निवास स्थान था. ऐसे में विष्णु ने एक युक्ति सोची एक दिन शिव और पार्वती भ्रमण के लिए बहार निकले और जब तक वो वापस लौटे तो उन्होंने द्वार पर एक नन्हे शिशु को रोते हुए देखा. माता पार्वती की ममता जाग उठी. और उस शिशु को उठाने लगी तभी शिव ने रोका और कहा. की उस शिशु को मत छुवो और पार्वती ने पूछा क्यों शिव बोले यदि अच्छा शिशु नहीं है सोचो ये अचानक यहाँ कैसे और कहा से आ गया. दूर तक कोई इसके माता पिता नजर नहीं आरहे थे. यही बच्चा नहीं बल्कि मायावी लगता है. लेकिन माता पार्वती ने नहीं मानी और वह बच्चे को उठाकर घर के अन्दर ले गयी. पार्वती ने बच्चे को चुप कराया. और उसे दूध पिलाया. फिर वह बच्चे को वही सुला कर शिव के साथ नजदीक के एक गर्म झरने में स्नान करने के लिए चली गयी. जब वह दोनों वापस लौटे. तो उन्होंने देखा की घर का दरवाजा अंदर से बंद था. पार्वती ने शिव से कहा की हम क्या करे. तो शिव ने कहा यह तुम्हारा बालक है. मै कुछ नहीं कर सकता अच्छा होगा की हम कोई नया ठिकाना ढूढ़ ले क्योकि यग दरवाजा अब नहीं खुलने वाला. और मै बल पुर्बक इस दरवाजे को नहीं खोलूँगा. कहते है शिव और पार्वती वह स्थान छोड़ कर केदारनाथ चले गए और वह बालक जो भगवान बिष्णु थे. वो वही जमे रहे. भगवान विष्णु ने उसे जबरन अपना विश्राम स्थल बना लिया.
चार धाम में से एक बद्रीनाथ के बारे में एक कहावत प्रचलित है जो जाता है बद्री वो आये न वदरी अर्थात जो व्यक्ति बद्रीनाथ के दर्शन कर लेता है. उसे पुन: गर्व में नहीं आना पड़ता है. मतलब दूसरी बार जन्म नहीं लेना पड़ता है.
शाश्त्रो के अनुसार मनुष्य को जीवन में कम से कम दो बार बद्रीनाथ की यात्रा जरुर कर लेनी चाहिए.




Comments